भाई दूज का सादर सप्रेम रामा-श्यामा

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जय गोमाता जय गोपाल
किसी न किसी नाते सृष्टि के सभी प्राणी सहोदर है, जैसे जननी के नाते, परिवार के नाते, समाज के नाते, उपासना के नाते, राष्ट्र के नाते, पृथ्वी के नाते, प्रकृति के नाते और परमात्मा के नाते हमारा सभी प्राणीयों से बन्धुत्व है, अर्थात् शरीर के नाते हम सभी प्राणी पृथ्वी की सन्तान होने से सहोदर है ही, आत्मा के नाते भी परमात्मा का अंश होने से परस्पर हम बन्धु है| अतः आज भाई दूज के दिन हमको हमारे सभी सहोदर भाइयों की प्रसन्नता एवं हित के लिये प्रतीकात्मक प्रकृति के साथ दीर्घकालीन व्यापक ध्येय को सामने रखकर हमारे सहोदर सभी प्राणी बन्धुओं की सुरक्षार्थ प्रसन्नतार्थ एवं हितार्थ वेदलक्षणा गोमाता की वैज्ञानिक महिमा को पुन:स्थापित करने का पावन संकल्प धारण करना चाहिये| वेदलक्षणा गोमाता की महिमा के अनुसार स्थान प्रदान करने से धेनु संरक्षण, धरती पोषण, प्रकृति संवर्धन, पर्यावरण शोधन एवं मानवीय संस्कृति का विकास होगा अर्थात् धरती के पोषण से सभी प्राणियों का सुखपूर्वक निर्वाह होगा, प्रकृति के संवर्धन से सभी प्राणी प्रसन्नता से रहेगे, पर्यावरण शुद्ध रहेगा, तो सभी प्राणियों को सम्पूर्ण आरोग्यदायक जीवन प्राप्त होगा| सभी प्राणियों के सुखी, प्रसन्न व निरोग रहने से ही सनातन मानवीय संस्कृति का विकास होगा।
अंहिसा, करुणा, परोपकार, सेवा, त्याग, प्रेम आदि मानवीय संस्कृति के विकास से ही वर्तमान तथा भविष्य में विश्व मानव जाति सहित जीव जगत का कल्याण एवं परमहित हो सकता है| यह सभी तब सम्भव होगा जब हम भारतवंशी वेदलक्षणा गोमाता की महिमा को समझकर उनकी कामधेनु स्वरूपा सन्तान अखिल गोवंश का संवेधानिक तथा व्यापारिक रुप से संरक्षण, सम्पोषण, संवर्धन करते हुए उनसे प्राप्त पंचगव्य का विधिपूर्वक विनियोग करने की आज से ही प्रतिज्ञा करें तथा वेदलक्षणा गोवंश के प्रति शासन की नियत व नीतियों एवं समाज के भावों और व्यवहार में अनुकुल परिवर्तन करने का प्रयास आज से प्रारम्भ करें |
- पूज्य गोऋषि स्वामी जी महाराज

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