गोसेवा से शुद्ध जीवनी शक्ति की प्राप्ति

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श्री सुरभ्यै नमः
🍃🍃🍃🍁सभ्यताओं, समाजों एवं राष्ट्रों की उन्नति, विकास, समृद्धि व सुरक्षा का प्रधान साधन शुद्ध जीवनी शक्ति से युक्त अन्न, जल तथा हवा है, जिस राष्ट्र में यह प्राणजीवन तीनों पदार्थ शुद्ध, स्वस्थ और पवित्र होंगे वहां के मानव सहित सभी प्राणी तन- मन और मस्तिष्क से निरोग, पवित्र तथा विवेकवान बनेंगे। उनकी सृजन शक्ति व समझ शक्ति श्रेष्ठ व सशक्त होगी। उनके द्वारा मानव सभ्यता उन्नत होगी। समाज स्वावलंबी बनेंगे एवं राष्ट्र समृद्ध व सुरक्षित रहेगा, अतः समाजों व राष्ट्रों के कर्णधारों का यह प्रमुख कर्तव्य है कि वह अपनी पृथ्वी को श्रेष्ठ सात्विक खाद का भोजन प्रदान करें, जिससे यह भूमाता पुनः राष्ट्रवासियों को शुद्ध अन्न, फल, औषधि आदि के रूप में आहार दे सकें। अपनी नदियों, अन्य जल स्त्रोतों को अविरल व निर्मल रखें जिससे प्रजा को पवित्र व स्वस्थ जल मिल सकें और अपने वन, पर्वत, अरण्य आदि गोभूमियों को श्रेष्ठ वृक्षों से परिपूर्ण रखें जिससे पवित्र ऑक्सीजन युक्त हवा सभी प्राणियों को प्राप्त हो सके। यह सभी केवल वेदलक्षणा गोवंश के अधिकाधिक सुखी संतुष्ट व निर्भीक सर्वत्र उपस्थिति से ही संभव है। अतः आईये गो नवरात्रि के सर्व कल्याणकारी पर्व पर पृथ्वीवासी पुनः वेदलक्षणा गोमाता की सत्ता, महत्ता, उपादेयता व आवश्यकता को समझे व स्वीकारें।
जय गोमाता जय गोपाल🍃🍃🍁🍁 

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