इस प्राणी जगत में सबसे अमूल्य निधि प्राण शक्ति है

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-पूज्य गोऋषि स्वामीजी महाराज

सादर सप्रेम हरि स्मरण जय गोमाता जय गोपाल
इस प्राणी जगत में सबसे अमूल्य निधि प्राण शक्ति है। समष्टि प्राण शुद्ध, स्वस्थ एवं सात्विक जीवनी शक्ति से संपन्न रहें तभी सभी देहधारियों के व्यष्टि प्राण शुद्ध, स्वस्थ, शक्ति संपन्न रह पाएंगे। अगर समष्टि प्राण अशुद्ध रुग्ण शक्तिहीन हो जाते हैं तो फिर सारा प्राणी जगत अनेक प्रकार के शारीरिक मानसिक तथा बौद्धिक रोगों से ग्रस्त होकर नाना क्लेश पाता है। वर्तमान समय में कुछ ऐसी स्थिति बन रही है, अतः समष्टि प्राणों को शुद्ध स्वस्थ शक्ति से परिपूर्ण बनाना सजग मानवों का प्राथमिक कर्तव्य हैं और उसका उपाय है वेदलक्षणा गौमाता तथा उनके अखिल गोवंश की आत्मीयता पूर्वक समर्पण भाव से सेवा करते हुए उनसे प्राप्त पंचगव्यों का विधिपूर्वक उपासना औषधि एवं आहार में विनियोग करना इसके लिए व्यापक स्तर पर वेदलक्षणा गौ संरक्षण सम्पोषण संवर्धन कार्य करते हुए गोमय गोमूत्र गोदुग्ध आदि पंचगव्यों का संकलन परिष्करण निर्माण तथा वितरण की योजना को संयुक्त रुप से साकार किया जाए।
आदि शक्ति सुरभि गौमाता एवं भगवान गोविंद जगन्नाथ जी से प्रार्थना है आप कृपा पूर्वक यह सर्वहितकारी कार्य करें और करावें।
इति मंगलम्।

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