पंचगव्य

पंचगव्य

पंचगव्य संकलन, अनुसंधान, प्रयोग एवं प्रशिक्षण

पंचगव्य संकलन, अनुसंधान, प्रयोग एवं प्रशिक्षण हेतु: बहुद्देषीय गोसेवा प्रकल्प 

श्रुति-स्मृति प्रतिपादित ब्रह्मर्ष श्रीवशिष्ठ की तपस्थली एवं श्री नन्दिनी गोचारण भूमि अर्बुदारण्य में एक धर्मात्मा गोभक्त द्वारा कामधेनु गुरूकुलम्, संतसेवार्थ प्राप्त 300 बीघा जमीन पर जुलाई सन् 2005 में श्रद्धेय गोऋर्ष श्रीस्वामीजी महाराज के दो माह का चातुर्मास अनुष्ठान किया था। इस चातुर्मास अनुष्ठान की अवधि में ही उपरोक्त जमीन का समतलीकरण तथा वृक्षारोपण का कार्य प्रारम्भ कर दिया था। दिसम्बर सन् 2005 में गीता जयन्ती के पावन पर्व पर आयोजित रा.का.क.म.के अवसर पर श्री गोधाम पथमेड़ा से जुड़े हुए गोभक्तों को अक्षय भूमि दान की अपील की गई। परिणाम स्वरूप सभी गोभक्तों से कुल 2500 बीघा भूमि प्राप्त हुई। इस समय 1200 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण भी हो गया।

पूज्य सन्तों की पावन प्रेरणा तथा सत्संकल्प से प्रेरित होकर श्री गोधाम पथमेड़ा की महासभा ने 2011 दीपावली के ज्योर्तिमय पर्व तथा गोनवरात्रि के अवसर पर ‘भारतीय गोकल्याण महामहोत्सव’ का ऐतिहासिक एवं अनुपम आयोजन इस भूमि पर करने का निर्णय लिया गया। तथा पूज्य सन्तों की आज्ञा से इस सुरम्य सथान का नाम रखा ‘श्रीमनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव’। यहाँ पर अभिनव ब्रज के रूप में नन्दगाँव, बरसाना, मधुपुरी, वृन्दावन, गोकुल आदि छः गांवों की स्थापना के कार्य प्रगति पर है ।

वर्तमान में 1200 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण, गोशाला, घास उत्पादन, विद्यालय, अतिथिभवन, सन्त आवास, छात्रावास, ग्वाला निवास बन चुके है। शेष -गोसंरक्षण एवं गोसंवर्धन, पांच हजार गोवंश के लिए गोचिकित्सालय, दस हजार गोवंश के लिए गो-आवास, पंचगव्य चिकित्सालय एवं अनुसंधानशाला, गोबर गैस आधारित विद्युत निर्माण संयन्त्र, गोग्राम उद्योग प्रशिक्षण केन्द्र, गोरस परिष्करण शाला, पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण, जैविक खेती, भूमि सुधार (समतलीकरण), सुरक्षा दीवार का निर्माण, 250 ग्वाला निवास, कामधेनु आवासीय विद्यालय, सत्संग सभा मण्डप, ग्रीन हाउस (जैविक सब्जियाँ हेतु), नर्सरी आदि का कार्य प्रगृति पर है।

श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगाँव में स्वरोजगार तथा स्वावलम्बन हेतु वर्ष में कई बार छोटे-बड़े प्रशिक्षण शिविर आयोजित होते हंै, जिसमें व्यक्ति, परिवार एवं गांव को स्वावलम्बी बनाने की प्रक्रियाएँ सिखाई जाती है इन प्रशिक्षण शिविरों में से निकलकर सैकड़ों व्यक्तियों ने परिवार एवं गाँवों को स्वावलम्बी बनाने का सर्वहितकारी कार्य प्रारम्भ किया है। इसमें गोकृषि  एवं वनस्पति आधारित रोजगारों का सृजन कर प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया जाता है।

वेदलक्षणा गाय का गोमय- श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा का संकल्प है कि देशवासियों को शुद्ध आहार (गोकृषि अन्न) प्राप्त हो इसके लिये सभी गोसेवाश्रमों में गोबर निर्मित जैविक खाद तैयार कर आस-पास के गोपालक किसानों को अल्प शुल्क में वितरित की जाती है। आनन्दवन परिसर में गोबर से केंचुआ खाद, सेन्द्रिय खाद तथा ढ़गला खाद सहित विभिन्न गोबर-गोमूत्र की खादों का निर्माण करके गोकृषि अन्न उत्पादन का प्रयोग प्रत्यक्ष श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव परिसर में किया जा रहा है। यह गोकृषि अन्न मनुश्य को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं बौद्धिक ज्ञान प्रदान करता है अर्थात् मनुष्य को सम्पूर्ण आरोग्य के लिये गोकृषि अन्न अपने दैनिक आहार में ग्रहण करना चाहिए।  

वेदलक्षणा गाय का गोमूत्र - श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा के संकल्पानुसार मानव जाति को जहरीले अन्न, पानी, हवा व ऐलोपेथिक दवाईयो से उत्पन्न असाध्य रोगों से मुक्त कराने के लिये श्री कामधेनु पंचगव्य औशधालय द्वारा स्वस्थ गो-बछड़ियो के गोमूत्र से आनन्दवन पथमेड़ा, मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव में अर्क बनाया जाता है। गोमूत्र अर्क, गोमय, दही तथा गोघृत के संयोग से सर्वरोगहर पंचगव्य औशधियों का निर्माण तथा सस्ती दर पर वितरण किया जाता है।

गोमूत्र अर्क में मौजूद तत्व व रसायन के लाभ

 

  •  यह रक्त व विष की विकृति को हटाता है, बड़ी आंत मै गति को शक्ति देता है, शरीर में वात पित्त व कफ दोश को स्थिर रखने में सहयोग करता है।
  • यह अनिच्छित व अनावश्यक वसा को निर्मित होने से रोकता है, लाल रक्त कोशिकाओं एव हीमोग्लोबिन के उत्पादन में सन्तुलन रखता है।
  •  यह जीवाणुनाशी व मूत्रवर्धक होने से विश (टोक्सिन) को नश्ट करता है, मूत्र मार्ग से पथरी को हटाने में सहायक है,  रक्तशुद्धि करता है।
  •  यह तेजाब विहीन, वंशानुगत गठिया रोग से मुक्त करता   है। आलस्य व मांसपेशियों की कमजोरी को हटाता है, कीटाणु नाशक, कीटाणु की वृद्धि रोकता है, (गेन्गरीन) मांस सड़ाव से रक्षा करता है।
  • यह रक्तशुद्धि कर्ता अस्थि में शक्ति प्रदाता  (कीटाणुनाशक), रक्त में तेजाबी अवयवों को कम करता है।
  • यह जीवन में शक्ति व उत्साह वर्द्धन में सक्रियता लाता है  व मानसिक रूग्णता व प्यास से बचाता है। अस्थि में पुनः शक्ति प्रदान कर जीवन में उमंग वृद्धि करते हुए पुनरोत्पादक शक्ति प्रदान करता है। यह रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति वर्द्धक, हृदय को शक्ति व संतोश प्रदान करता है।

वेदलक्षणा गाय का दूध - वैदिक देवताओें, गोसेवा प्रेमी सन्तों, गोउपासक विद्वानों एवं गोसेवापरायण गोभक्तों-गोसेवकों के उपासना, औषधि तथा आहार में उपयोग करने के लिये मनोरमा गोरस भण्डार द्वारा गोशालाओं एवं गोपालकों से वेदलक्षणा गाय का दूध संकलन एवं परिष्करण करके उससे (दुग्धान्न) दुग्ध, दहि, छाछ, घृत, मिठाई आदि का निर्माण एवं वितरण किया जाता रहा है। वेदलक्षणा का दूध- स्वादिष्ट, रुचिकर, स्निग्ध, बलकारक, अतिपथ्य,कांतिप्रद, बुद्धि, प्रज्ञा, मेधा कफ, तुष्टि, पुष्टि वीर्य और ओज को बढ़ाने वाला, आयु को दृढ़ करने वाला, हृदय रसायन, गुरु, पुरुषत्व प्रदान करनेवाला होता है। जहाँ दूध शब्द का प्रयोग होता है वहाँ उसे गाय का ही दूध मानना चाहिये। वेदलक्षणा गाय का दूध संतुलित रूप से शरीर का विकास करता है।

वेदलक्षणा गाय का दही- स्वादिष्ट, बलवर्धक, रुचिकर, तेजस्वी, दीपन, पोष्टिक, मीठा,ग्राह्य अर्श का नाश करने वाला है। डायबिटीज (मधुमेह) के रोगी द्वारा नियमित रूप से देषी गाय के दूध का बना ताजा दही 100 ग्राम सेवन करने से शरीर में स्फुर्ति रहेगी। इससे यह रोग पूर्णतया मिट सकता है।

वेदलक्षणा गाय की छाछ -जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाली और त्रिदोष तथा अर्शका नाश करनेवाली होती है। साधारण छाछ स्वादिष्ट, ग्राही, खट्टी, तुर्श, लघु, गरम, पाक के समय मधुर, तीखी,रुखी,बलप्रद, तृप्तिकर, हृदय को बल प्रदान करने वाली, रूचिकर और शरीर को कृश बनाने वाली होती है।

वेदलक्षणा गाय का घी- आयुवर्द्धक, बुद्धिवर्द्धक, शुक्रवर्धक, रस और पाक में स्वादिष्टि,जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाला,स्निग्ध, सुगन्धित, रुचिकर, नेत्रों की ज्योति बढ़ाने वाला, कांतिकारक, वृश्य और मेघा, लावण्य, स्वरकारक, हृदय, तेज और बल देने वाला होता है। बालकों, वृद्धों तथा कमजोरों के लिये ठोस,वात, पित्त, कफ, दमा, विश आदि दोषों का नाश करता है एवं गो दुग्ध, घृत आदि से निर्मित मिठाइयां रूचिकारक, हितकारक, पौष्टिककारक व सुखद् परिणामकारी होती है।

                अतः सभी गोसेवा प्रेमी संतों, गोउपासक विद्वानों, गोभक्तों एवं गोसेवाकों से निवेदन है कि यथा उपलब्ध एवं यथा सम्भव उपरोक्त गोकृषि अन्न, गोदुग्धान्न का अपनी उपासना, औषधि व आहार में प्रयोग करने का प्रयास करें

 

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